क्या आप अकेले यात्रा करती हैं ?

“मैं कभी कहीं अकेले नहीं गई , तो अब कैसे जाऊँ ?”मैं हैरान थी |यह विचार भी किसी के मन में आ सकता है मेरी कल्पना से परे था| मैं उसे और उसके परिवार को कई सालों से जानती थी| वो एक पढ़ी लिखी समझदार लड़की थी |उसके मुँह से ये बात सुनके मैं सोच में पड़ गयी |

मुझे 15 साल पहले का वो दिन याद आया जब मैंने पहली विदेश यात्रा की थी| मैंने अभी अभी अपनी इंजीनियरिंग ख़त्म की थी और मैं महज़ २० साल की थी | मेरे परिवार से कोई कभी भारत के बाहर नहीं गया था | मैं पहली बार भारत के बाहर जा रही थी | लेकिन न मेरे सर पर और न ही मेरे माता-पिता के चेहरे पर कोई शिकन थी |पर इससे पहले मैं कई बार भारत में अकेले सफर कर चुकी थी | मुंबई में पली -बढ़ी थी तो लोकल ट्रैन में आना-जाना मेरे लिए रोज़ की बात थी | पापा के कई तबादलों के कारण देश के लगभग हर कोने में घूम चुकी थी | कई बार हवाई जहाज़ की यात्रा भी कर चुकी थी | शायद इसीलिए मुझमें वह आत्मविश्वास था |

बचपन में कई बार हम मम्मी के साथ सफर करते थे | अपने काम की व्यस्तता के कारण हर बार पापा हमारे साथ नहीं आ पाते थे | मेरी माँ एक छोटे से गांव से थी और शादी से पहले कभी बस में भी नहीं बैठी थी | लेकिन धीरे धीरे पापा ने उन्हें सब समझाया और आत्मनिर्भर बनाया | हम छोटे छोटे बच्चों को लेकर अक्सर मम्मी २ दिन का ट्रैन का सफर भी आसानी से कर लेती थी | शायद ये आत्मविश्वास भी मुझे उनसे विरासत में मिला था | शादी के बाद और फिर बच्चे होने के बाद मुझे भी कई बार अकेले यात्रा करनी पड़ी | हर बार तो पति अपना काम छोड़के नहीं आ सकते थे | क्योंकि मैंने बचपन से अपने घर में यह देखा था मेरे लिए ये बहुत ही सहज और स्वाभाविक था| इसमें कोई अचरज की बात नहीं थी |

लेकिन जैसे जैसे मैं बड़ी हुई मैं कई ऐसी लड़कियों से मिली जिन्होंने कभी अकेले सफर नहीं किया | और मैं पढ़ी लिखी महिलाओं की बात कर रही हूँ | हमेशा उनके साथ पिता,भाई या पति में से कोई होता था | इनमे से कुछ को मैंने पहली बार अकेले यात्रा करते हुए भी देखा, थोड़ी घबराई हुई थी | परन्तु यात्रा खत्म होने के बाद जो उनको आत्मविश्वास और उपलब्धि का एहसास हुआ शब्दों में बयां करना मुश्किल है |

क्या कारण है कि हम २१वी सदी में भी हमारी महिलाओं को घर से बाहर अकेले भेजने में कतराते है | असामाजिक तत्व एक औरत के लिए उतने ही खतरनाक है जितने कि पुरुष के लिए | एक पुरुष जब घर से बाहर जाता है तो क्या उसके साथ दुर्व्यवहार होने की कोई सम्भावना नहीं है ? क्या सब डरके घर में दुबकके बैठ जाए |बेहतर ये न होगा कि अपने आप को सशक्त बनायें | अकेले यात्रा करते वक़्त किन बातों को ध्यान में रखना चाहिए इस पर एक विस्तार से ब्लॉग लिखूंगी |

दूसरा सबसे बड़ा कारण है हमारे समाज में फैली दकियानूसी मानसिकता | आज भी कई घरों में शान के खिलाफ माना जाता है कि घर की बहु बेटियां अकेले बाहर जाएँ | कुछ घरों में तो मैंने देखा है कि जो लड़की शादी के पहले बड़ी आसानी से अकेले सफर करती थी, शादी के बाद ससुराल वालों को नाराज़ ना करने के डर से अब कहीं अकेले नहीं जाती| और यदि ऐसे घर में कोई लड़की नौकरी करने की इच्छा ज़ाहिर करे तो मानो कोई पाप कर दिया हो | इस सोच के पीछे का तर्क मुझे कभी समझ नहीं आया |

और तीसरा जो सबसे ज्यादा चौकाने वाला कारण है लड़कियों में आत्मविश्वास की कमी | मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ जब कुछ लड़कियों ने अपने आप पर संदेह किया|शायद उन्होंने कभी अपनी माँ, चाची, दीदी को अकेले आते जाते नहीं देखा| कभी किसी ने प्रोत्साहित भी नहीं किया| इसलिए कभी वो आत्मविश्वास ही नहीं बन पाया|

विडम्बना है कि जहाँ एक ओर इस देश की लड़की अंतरिक्ष की उड़ान भर चुकी है तो वहीँ आज भी हज़ारों लड़कियां ट्रैन में भी अकेले जाने से घबराती है | आशा करती हूँ आप उन हज़ारों में से एक ना हो | और यदि आप है, तो आशा करुँगी ये ब्लॉग पढ़के आपको प्रेरणा मिले और आप अपने आप पर भरोसा करके अपने कदम घर से बाहर ले जाएँ |

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Ritu Vyas

IT Professional with 10+ years of experience, blogger at heart. This website is my dream child where I combine both my passions. I feel there is a lot that still needs said and done for women in workplaces.

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