आज़ादी

आओ बच्चों मनाएं हम जश्न ए आज़ादी
आज़ादी ? वो क्या होता है दीदी ?

आज़ादी अपनी मर्ज़ी से जीने की
आज़ादी अपने मन का करने की
आज़ादी खुली हवा में सांस लेने की
आज़ादी अपनी एक उड़ान भरने की

आज़ादी अपनी मर्ज़ी से जीने की ?
पर मुझे तो जीवन ही नहीं मिला
अभी तो फूल पूरा भी नहीं था खिला
माँ की कोख में थी एक नन्ही परी
कुचल दी गयी, फिर से एक बेटी मरी

आज़ादी अपने मन का करने की ?
जब कुछ करने के लायक बनी
माँ बाप ने मंडप में बिठा दिया
अनजान लोगों के साथ उनके घर पर भेज दिया
अब यही तेरा घर है परिवार है याद रखना
हम अब पराये हुए ना कोई उम्मीद रखना

आज़ादी खुली हवा में सांस लेने की ?
कुरीतियों के पहरे से कहीं दूर जाना चाहती थी
मैं अपनी एक खुद की पहचान बनाना चाहती थी
एक दिन सब ज़ंजीरें तोड़कर, निकली थी घर से बाहर
रास्ते में भेड़िये मिले आदमी का भेस बदलकर
आ गयी फिर उसी बंद दरवाज़े के पीछे
घुटी हुई डरी हुई सहमी हुई आँखों को मींचे

आज़ादी अपनी एक उड़ान भरने की?
काट दिए पंख मेरे जीवन के हर मोड़ पर
अब तो अपनी सारी इच्छाओं का गला घोंटकर
बेज़ुबाँ हूँ पर खा रही हूँ पी रही हूँ
अगर इसे जीना कहते है तो जी रही हूँ

यह सुन चुप हो गयी मैं
और सोच में पड़ गयी मैं
देश तो आज़ाद हो गया
पर इस देश की बेटी कब आज़ाद होगी ?
अपनी मर्ज़ी से जियेगी, अपने मन का करेगी
खुली हवा में सांस लेगी
कब वो पंख पसारें उन्मुक्त गगन में उड़ान लेगी ?

Ritu Vyas

IT Professional with 10+ years of experience, blogger at heart. This website is my dream child where I combine both my passions. I feel there is a lot that still needs said and done for women in workplaces.

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